हर लबों पर या हुसैन इब्ने अली की सदाएं
फातेहाना अंदाज में निकला मियां साहब का शाही जुलूस गोरखपुर। सुबह से सड़कें पर नजर टिकी हुई थी। इंतजार हो रहा था फौज का। सफेद लिबास, खाकी वर्दी, घुड़सवार और सभी के हाथों में फौजियों वाले भाले, बंदूकें, बीच में लकदक सफेद लिबास मंे चल रहे मियां साहब जैसे ही दिखे.....शोर उठा मियां साहब आ गए। अहिस्ता-अहिस्ता कदम बढ़ा रहे मियां साहब को देखने क लिए भीड़ बेताब हो उठी। जुलूस गुजरा तो लोग पीछे-पीछे चलने लगे। एक कारवां चल पड़ा जो कि फिर इमामबाड़ा में ही पहंुच कर समाप्त हुआ। बीते तीन सौ साल की पुरानी रिवायत के मुताबिक निकल रहा इमामबाड़ा स्टेट के मियां साहब का दसवीं का शाही जुलूस पश्चिमी फाटक से सुबह पूरे शानो शौकत से निकला। जुलूस जिधर से भी निकला देखने वाले देखते रह गए। भीड़ इतनी कि गलियांे और छतों एक हो रही थीं। मियां साहब का जुलूस इमामबाड़ा कमाल शाह की मजार पर फाातिहा पढ़ने के बाद जुलूस बक्शीपुर की ओर मुड़ा। जुलूस के सबसे आगे इमामबाड़ा स्टेट का परचम उसके पीछे पैदल सवार हाथांे में भाला लिये सिपाही, घुड़सवार दस्ता, ऊंट और उनके पीछे सफेद वर्दी में अंगरक्षक चल रहे थे। मियंा साहब के निजी सुरक्...