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जन्मदिन मनाने के लिए चार साल का इंतेजार, साल गिराह के लिए भी

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गोरखपुर। जिला महिला चिकित्सालय में सविता व जिमी के लिए 29 फरवरी खास सौगात लेकर आयी। इनके यहां जन्मी नन्ही परी जेनीफर। सूरजकुंड के रहने वाले इस दंपत्ति के साथ अस्पताल में कई और दंपत्तियों के घर गूंजी किलकारी। जहां इन बच्चों की पैदाइश से घरों में किलकारी गूंजी वहीं इनकी बच्चों की जिदंगी से एक खास बात भी बावस्ता है चूंकि इनका जन्म 29 फरवरी को हुआ है और यह तारीख चार साल में एक बार पड़ती है इस लिहाज से इनका जन्मदिन चार साल बाद पड़ेगा। वहीं लगन का सीजन भी उरूज पर है। इलाहीबाग के रहने वाले जीशान व शबनम की शादी आज ही हो रही है इसलिए इन्हें भी शादी की सालगिराह मनाने के लिए चार साल का इंतेजार करना पड़ेगा। चूंकि यह लगन का सीजन है। तमाम मैरज हाउस में शादियां चल रही है। इसलिए जिनकी भी शादियां हो रही है उन्हें चार साल का इंतेजार करना पड़ेगा।

गोरखपुर: सालों पुरानी मस्जिद के पक्ष में हाईकोर्ट का तारीखी फैसला, प्रशासन कब्जा दिलाने में नाकाम

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दीवान बाजार में जमींदोज मस्जिद का मामला झांड झंखाड़ की वजह से नहीं पता चलता वजूद जिलाधिकारी, एसएसपी, नगर निगम, सिटी मजिस्टेªट के खिलाफ हाईकोर्ट में है रिट गोरखपुर। ये सितम नहीं तो और क्या है कि हिन्दुस्तान के बटवांरे क बाद मुल्क में हजारों मस्जिदें अब तक आजाद नहीं हो सकी है। उन्हीं में से एक मस्जिद गोरखुपर के दीवान बाजार मुहल्ले में मौजूद है। जो खंडहर की शक्ल अख्तियार कर चुकी है। हालांकि इस विवादित मामलें मंे हाईकोर्ट ने मस्जिद के हक मंे तारीखी फैसला दे दिया है। इसके बावजूद हाईकोर्ट के फैसले पर अमल नहीं हो सका है। मस्जिद पक्षकार ने जिलाधिकारी, एसएसपी, नगर निगम, सिटी मजिस्टेªट को पार्टी बनाकार हाईकोर्ट में कब्जे के लिए रिट दाखिल की जिसकी सुनवाई जारी है। मिली जानकारी के अनुसार इस मस्जिद को पुरानी मस्जिद दीवान बाजार के नाम से जाना जाता है। जिस का आराजी नं. 201, 202 है। जबकि पुराना आराजी नं. 141, 140 है। सन् 1980 में वक्फ बोर्ड ने इस मस्जिद के तौर पर वक्फ नं. 37 एलाॅट करते हुए इस को मुतवल्ली भी नियुक्त किया। बताया जाता है कि वतन के बटवांरे के बाद मस्जिद की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा तो...