जिलज्जिा की 10,11,12 तारीख कुर्बानी के लिए मख्सूस दिन है। मगर पहला दिन अफजल है। देहात में 10 जिलहिज्जा की तुलू फज्र के बाद ही से कुर्बानी हो सकती है मगर बेहतर यह है कि तुलू आफताब के बाद कुर्बानी की जाये। शहर मं नमाजें ईद से पहले कुर्बानी नहीं हो सकती। कुर्बानी दिन में करनी चाहिए। दरमियानी रातों में जिब्ह करना मकरूह है।
जिलज्जिा की 10,11,12 तारीख कुर्बानी के लिए मख्सूस दिन है। मगर पहला दिन अफजल है। देहात में 10 जिलहिज्जा की तुलू फज्र के बाद ही से कुर्बानी हो सकती है मगर बेहतर यह है कि तुलू आफताब के बाद कुर्बानी की जाये। शहर मं नमाजें ईद से पहले कुर्बानी नहीं हो सकती। कुर्बानी दिन में करनी चाहिए। दरमियानी रातों में जिब्ह करना मकरूह है।

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